कश्मीर और बॉलीवुड का पुराना रिश्ता रहा है. पहले कई बॉलीवुड फिल्में कश्मीर की वादियो में शूट होती थी. वहां को लोग भी बड़े चाव से फिल्में देखते थे, लेकिन आतंकवाद के चलते धीरे-धीरे ये सब खत्म होता चला गया और अतीत की बात बन गई. लेकिन अब स्थानीय बिजनेसमैन और व्यापारी राज्य में फिल्म संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए कदम उठा रहे हैं. आज यानी मंगलवार श्रीनगर में पहला मल्टीप्लेक्स खुलेगा और इस मल्टीप्लेक्स में आमिर खान (Aamir Khan) और करीना कपूर खान स्टारर ‘लाल सिंह चड्ढा’ दिखाई जाएगी.

कई सालों के बाद यह पहली बार होगा जब लोग सिनेमाघर में जाकर बड़े पर्दे पर फिल्म देखेंगे. इस मल्टीप्लेक्स में 520 सीटें हैं और यह सेना मुख्यालय के पास स्थित है. यह चौबीसों घंटे चौकसी वाला एक सुरक्षित क्षेत्र है. मल्टीप्लेक्स में तीन ऑडिटोरियम हैं, जिनमें से दो पर मंगलवार को आमिर खान ‘लाल सिंह चड्ढा’ (Laal Singh Chaddha) की स्क्रीनिंग होगी.

पिछले तीन दशकों में, कई लोगों ने सिनेमा हॉल को नया रूप देने की कोशिश की है, लेकिन उन्हें या तो उग्रवादियों की धमकियों या जनता की ओर से रुचि की कमी के कारण उन्हें बंद करने के लिए मजबूर किया गया है.

इस मल्टीप्लेक्स के मालिक विजय धर ने न्यूज 18 को कहा- “एक परिवार की एक साथ फिल्म देखने की संस्कृति खो गई है. हम कश्मीर में युवाओं और बुजुर्गों के मनोरंजन के लिए एक आरामदायक जगह देने की कोशिश कर रहे हैं.” विजय एक कश्मीर पंडित हैं और उन्होंने सालों पहले श्रीनगर में एक उस वक्त एक स्कूल खोला जब उनके दोस्तों ने उन्हें कश्मीर में नहीं जाने की सलाह दी थी.

50 प्रतिशत लोगों ने भी नहीं देखी सिनेमाहॉल में फिल्में

विजय धर ने बताया कि वह फिल्मों के शौकीन रहे हैं. वह 70 और 80 के दशक के कई टॉप फिल्मों के सेट पर वक्त बिता चुके हैं और श्रीनगर में इस मल्टीप्लेक्स के खुलने पर उन्हें उन पलों की याद आ रही है.  उन्होंने आगे कहा, “हम कश्मीर में सिनेमा को पुनर्जीवित करना चाहते हैं. 50 प्रतिशत लोगों ने सिनेमाहॉल में फिल्म नहीं देखी है.”

आतंकवाद से पहले कश्मीर में थे 10 सिनेमाहॉल

बता दें, 1990 और 2018 के बीच, कई मालिकों ने सिनेमा को फिर से शुरू करने की कोशिश की, लेकिन महीनों के भीतर बंद करना पड़ा. आतंकवाद से पहले, श्रीनगर में 10 सिनेमा हॉल थे- अनंतनाग, सोपोर और कुपवाड़ा में एक-एक. लेकिन जब 1989 में घाटी में हिंसा ने कहर बरपाया, तो ‘अल्लाह टाइगर्स’ नामक एक आतंकवादी संगठन ने फिल्मों पर प्रतिबंध लगा दिया. मालिकों और कर्मचारियों को बेरोजगार कर दिया गया और उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में सालों लग गए.