फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के शेयर ने निवेशकों को जोर का झटका दिया है. सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को इंट्रा डे में जोमैटो का शेयर 71.10 रुपये के रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया. बाद में इसमें थोड़ा सुधार हुआ और यह 2.51 फीसदी की गिरावट के साथ 72 रुपये के स्‍तर पर बंद हुआ.

पिछले पांच दिनों में यह शेयर 11.49 फीसदी गिर चुका है. वर्ष 2022 में अब तक यह शेयर 49.6 फीसदी तक नीचे आ चुका है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार संस्‍थागत निवेशकों का इस स्‍टॉक पर भरोसा अब डगमगाने लगा है. मार्च, 2022 में समाप्‍त तिमाही में घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने अपनी 2.82 फीसदी हिस्सेदारी में से 8.3 करोड़ इक्विटी शेयर यानी 1.1 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है. एफपीआई ने जोमैटो में मार्च तिमाही में अपनी हिस्‍सेदारी 0.9 फीसदी कम की है. दिसंबर तिमाही में एफपीआई की हिस्‍सेदारी 10.17 फीसदी थी.

नहीं रूक रही गिरावट

Zomato की बंपर लिस्टिंग हुई थी. 53 फीसदी प्रीमियम पर जोमैटो का शेयर NSE पर 116 रुपये पर लिस्ट हुआ. BSE पर यह शेयर 115 रुपये के स्तर पर लिस्ट हुआ. जोमैटो आईपीओ के लिए इश्यू प्राइस 72-76 रुपए के बीच था. शेयर ने 16 नवंबर 2021 को 169 रुपये का ऑल टाइम हाई स्‍तर छूआ. अब तक यह अपने ऑल टाइम हाई से करीब  57 फीसदी टूट चुका है. पिछले छह महीने में इस शेयर में 45.72 फीसदी की गिरावट आई है तो एक महीने में यह 15.34 फीसदी नीचे आ चुका है.

क्‍यों गिर रहे हैं शेयर?

पहले से ही दबाव में चल रहे जोमैटो के शेयरों को 4 अप्रैल को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा दिए एक आदेश से तगड़ा झटका लगा है. सीसीआई ने 4 अप्रैल को कहा कि स्विगी और जोमैटो के कारोबारी तरीकों की जांच की जरूरत है. इन दोनों ऐप्‍स पर आरोप है कि इन्‍होंने पेमेंट साइकिल में देरी, नियमों को एकपक्षीय तरीके से लागू करने और बढ़ा-चढ़ाकर कमीशन वसूलने जैसे गलत कारोबारी तरीके अपनाए हैं.

स्विगी और जोमैटो  पर यह आरोप नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने लगाए थे तथा सीसीआई से जांच की मांग की थी. इसके बाद ही CCI ने मामले की जांच करने का निर्णय लिया. CCI ने डायरेक्टर जनरल से इन आरोपों की जांच 60 दिन के अंदर करके रिपोर्ट देने को कहा है. वहीं, जोमैटो का कहना है कि कंपनी जांच में सहयोग के लिए आयोग के साथ मिलकर काम करती रहेगी और रेगुलेटर को बताएगी की उसके तौर-तरीके प्रतिस्पर्धा कानूनों के अनुरूप हैं.