पंजाब में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आने वाली आम आदमी पार्टी अपनी पहली चुनावी गारंटी पूरा करने के करीब है. सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, भगवंत मान सरकार जल्द ही पंजाब में हर घर को 300 यूनिट फ्री बिजली देने की योजना का ऐलान कर सकती है. मंगलवार को इस मसले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के बीच ढाई घंटे तक बैठक हुई. इसके बाद पंजाब के सीएम भगवंत मान ने ट्वीट करते कहा कि बहुत जल्द पंजाब के लोगों को एक अच्छी खबर दूंगा. इसे रीट्वीट करते हुए केजरीवाल ने कहा कि हम सब मिलकर दिल्ली, पंजाब और पूरा देश बदलेंगे. आज बुधवार को चंडीगढ़ में होने वाली कैबिनेट बैठक में 300 यूनिट मुफ्त बिजली के मसले पर चर्चा हो सकती है.

पंजाब के विधानसभा चुनावों में बिजली एक बहुत बड़ा मुद्दा रही थी. तब आम आदमी पार्टी ने अपनी चुनावी गारंटी की घोषणा करते हुए कहा था कि सत्ता में आने पर पंजाब में सभी घरों को 300 यूनिट फ्री बिजली और 24 घंटे बिजली दी जाएगी. चुनावों में जबर्दस्त बहुमत लेकर 16 मार्च को सीएम बनने वाले भगवंत मान की तरफ से अभी तक मुफ्त बिजली का वादा पूरा न किए जाने को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जनता में भी सवाल उठ रहे हैं. मुफ्त बिजली का गणित कैसे बिठाया जाए, इसमें केजरीवाल खुद जुटे हुए हैं. पिछले दिनों में वह पंजाब सरकार, बिजली विभाग और अन्य अफसरों के साथ कई बैठकें कर चुके हैं. मंगलवार को हुई बैठक में भगवंत मान, मनीष सिसोदिया, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के अलावा प्रदेश के कई आला अफसर भी मौजूद थे.

अधिकारियों के मुताबिक, पंजाब में पहले से कुछ वर्गों के लिए मुफ्त बिजली की स्कीम लागू है. इसके तहत एससी, ओबीसी और गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को 200 यूनिट फ्री बिजली दी जाती है. लेकिन आप सरकार अब हर घर के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने पर काम कर रही है. जो भी 300 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करेगा, उससे पूरे बिल का पैसा लिया जाएगा.

इस वादे को पूरा करने में पंजाब सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या ये आ रही है कि इसके खर्च की भरपाई कैसे हो. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार पहले से ही लगभग 3 लाख करोड़ के कर्ज में दबी है. पंजाब में करीब 73 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से लगभग 15 प्रतिशत को इस वक्त मुफ्त बिजली का फायदा मिल रहा है. 2021-22 में इस पर सरकार को 10,668 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे. इसमें से 7180 करोड़ किसानों पर, 1627 करोड़ एससी, ओबीसी और बीपीएल ग्राहकों पर खर्च हुए थे. अब सबको मुफ्त बिजली देने से सरकारी खजाने पर लगभग 5000 करोड़ का बोझ अलग से पड़ने की आशंका है.