दिल्ली में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है. राजधानी दिल्ली में कोरोना के पॉजिटिविटी रेट में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है. एक सप्ताह पहले तक जहां दिल्ली में कोविड -19 की सकारात्मकता दर (पॉजिटिविटी रेट) 1% से कम थी, सोमवार को बढ़कर 2.7% हो गई. यहां बताना जरूरी है कि पिछले 24 घंटों में परीक्षण किए गए केवल 5079 सैंपल्स में से दिल्ली में कोरोना वायरस के 137 नए केस सामने आए हैं. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह पॉजिटिविटी रेट मामलों में एक और उछाल का संकेत देता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में कमी है, तब तक चिंता की कोई बात नहीं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, राजधानी में कोरोना की सकारात्मकता दर में वृद्धि पर डॉक्टरों ने कहा कि मामले बढ़ सकते हैं, मगर यह तब तक चिंता का विषय नहीं होना चाहिए, जब तक अस्पताल में भर्जी होने वाले मरीजों की संख्या नहीं बढ़ती है. एम्स के डॉ. नीरज निश्चल ने कहा कि वायरस अभी भी वातावरण में मौजूद है. इसलिए हम इसके कारण होने वाले संक्रमणों को देख पा रहे हैं. अगर कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर कम रहती है, तो यह बिल्कुल भी चिंता का कारण नहीं होना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक सप्ताह में एम्स अस्पताल में कोरोना के मरीजों के एडमिट होने की संख्या में कोई बड़ी वृद्धि नहीं हुई है.

दिल्ली सरकार द्वारा साझा किए गए हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, वर्तमान में कुल 9745 बेडों में से केवल 47 (0.48%) बेडों पर कोरोना मरीज हैं. इनमें कलावती सरन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में 11, राम मनोहर लोहिया अस्पताल में आठ, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में छह और लोक नायक अस्पताल में चार मरीज शामिल हैं. कलावती सरन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के एक डॉक्टर ने कहा कि कुछ रोगियों को अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उनमें कोरोना पाया गया.

दिल्ली में इस समय कोरोना के 601 सक्रिय मामले हैं. अधिकारियों ने कहा कि इनमें से 447 मरीज होम आइसोलेशन में हैं. एक प्रमुख निजी अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा कि मैंने पिछले एक हफ्ते में कोरोना के दो से तीन मामले देखे हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर में हल्के लक्षण थे. उन्हें भर्ती करने की आवश्यकता नहीं थी. उन्होंने कहा कि वैक्सीन से संक्रमण रोकने में मदद मिल रही है.