भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे देश के ज्‍यादातर हिस्‍सों में आज जनजीवन अस्‍त व्‍यस्‍त है. चिलचिलाती गर्मी के इस मौसम से आने वाले कुछ दिनों में राहत मिलने की उम्‍मीद है और ये राहत लेकर आएंगे एक के बाद एक दो पश्चिमी विक्षोभ. 12 अप्रैल से सिलसिलेवार पश्चिमी हिमाचल के पास पहुंच रहे ये पश्चिमी विक्षोभ अपना असर दिखाएंगे. नतीजतन 13 अप्रैल से उत्‍तर भारत के कुछ हिस्‍सों में गरज के साथ बारिश, धूल भरी आंधी चलेगी और गर्मी की लहर कम होगी.

स्‍काईमेट के मौसम विशेषज्ञों ने न्‍यूज18 हिंदी (डिजिटल) से बातचीत में कहा कि अभी हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब एवं अन्‍य राज्‍यों के कुछ हिस्सों में तेज धूप का दौर है, जोकि 12 अप्रैल तक जारी रह सकता है. यह उत्तरी मैदानी इलाकों को प्रभावित करने वाली गर्मी की लहर (Heat Wave) के सबसे लंबे दौरों में से एक हो सकता है. उन्‍होंने अपने पूर्वानुमान में कहा कि एक पश्चिमी विक्षोभ के 12 अप्रैल की रात को पश्चिमी हिमालय के पास पहुंचने की उम्मीद है. वहीं, दूसरा पश्चिमी विक्षोभ 15 अप्रैल के आसपास आएगा.

इन वेस्‍टर्न डिस्‍टर्बेंस का असर 13 अप्रैल से पश्चिमी हिमालय में शुरु होगा, जिसके चलते बारिश और गरज के साथ मुख्य मौसमी गतिविधियां शुरू होंगी. उनके अनुसार 13 से 17 अप्रैल के बीच पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बारिश, धूल भरी आंधी और हल्की गरज के साथ छिटपुट प्री-मॉनसून गतिविधियां हो सकती हैं. मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस अवधि के दौरान इन उपरोक्त क्षेत्रों से गर्मी की लहर कम हो सकती है.

एजेंसी के प्रमुख मौसम विज्ञानी डॉ. महेश पालावत कहते हैं कि बीते मार्च के महीने में करीब चार से पांच पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय तक पहुंचे, लेकिन इनमें से कोई भी उतना सक्रिय नहीं था जो अपना असर दिखा सके. ये उत्तर भारत की पहाड़ियों पर बारिश या बर्फ़बारी के रूप में कोई महत्वपूर्ण मौसम गतिविधि देने में सक्षम नहीं थे.

उनका कहना है कि अप्रैल के पहले दस दिनों में भी कोई महत्वपूर्ण पश्चिमी विक्षोभ नहीं देखा गया. पश्चिमी और उत्तर-पश्चिम दिशा से शुष्क और गर्म हवाएं उत्तरी मैदानी इलाकों में जारी रहीं, जिससे कई स्थानों पर लू की स्थिति बनी रही. हिमाचल प्रदेश के जम्मू संभाग और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी लू देखी गई.