केंद्र सरकार कई योजनाओं को आधार कार्ड से जोड़ चुकी है. पैन कार्ड को भी आधार से लिंक करना सरकार ने अनिवार्य कर दिया है. ऐसा नहीं करने पर अगले साल से पैन कार्ड निष्क्रिय हो जाएगा. अब केंद्र सरकार आधार को जाति और आय प्रमाण-पत्र से लिंक करने की योजना बना रही है.

देश के कुछ राज्‍यों में इसको जल्‍द ही लागू किया जा सकता है. इससे सरकार को एक ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम बनाने में मदद मिलेगी. आधार के जाति और आय प्रमाण-पत्र से लिंक हो जाने विभिन्‍न योजनाओं के लाभार्थियों को फायदा और इससे योजनाओं का लाभ अपात्र लोग नहीं उठा पाएंगे.

इकोनॉमिक टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार जाति और आय प्रमाण-पत्र को आधार से लिंक करके सबसे पहले आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के विद्यार्थियों को सीधे उनके खातों में स्‍कॉलरशिप देगी. इससे 60 लाख विद्यार्थियों को फायदा होगा. ऐसा इस कारण होगा क्‍योंकि जाति और आय के प्रमाणपत्र आधार से लिंक होने के बाद ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम के जरिए सरकार को सही लाभार्थी तक लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी.

इन राज्‍यों से होगी शुरूआत

ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम के जरिए स्कॉलरशिप बांटने का काम केंद्र सरकार सबसे पहले राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में करेगी.  इन राज्यों में जाति और आय प्रमाणपत्रों को आधार से जोड़ने का कार्य पूर्ण हो चुका है. इस व्यवस्था से पात्र बच्चों को समय से स्कॉलरशिप मिल सकेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सचिवों के साथ बैठक के बाद ये फैसला लिया गया है.

अभी है कई खामियां

बैठक में अनुसूचित जाति के बच्चों को दसवीं के बाद दी जाने वाली छात्रवृति व्‍यवस्‍था को पूरी तरह डिजिटल करन का सुझाव दिया गया था. इसीलिए अब सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में ही योजना को धरातल पर उतारने का लक्ष्‍य रखा है. मंत्रालय ने वर्तमान में मौजूद छात्रवृति व्‍यवस्‍था में कई खामियों का पता लगाया है. ऐसा भी हुआ है कि एक ही बैंक खाता 10 और 12 छात्रों से जुड़ा पाया गया. इन खातों के हिसाब-किताब की जिम्‍मेदारी शैक्षणिक संस्‍थानों के पास है. लेकिन अब इन खातों के आधार से जुड़ने के बाद हर छात्र के खाते में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए छात्रवृत्ति पहुंचेगी जिससे इसमें गड़बड़ी गुंजाइश नहीं रहेगी.