नए वित्त वर्ष 2022-23 की शुरुआत के साथ ही आम लोगों को महंगाई का बूस्टर डोज लगना शुरू हो गया है. 1 अप्रैल से खाने-पीने की वस्तुओं, सीएनजी एवं अन्य कई वस्तुओं के दाम बढ़ने के साथ-साथ 800 जरूरी दवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है. इन दवाओं में खांसी, बुखार, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के इलाज में काम आने वाली दवाओं सहित दर्द निवारक दवाएं भी शामिल हैं. यानी अब मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों का इलाज कराने के लिए भी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी.

नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथॉरिटी ने 1 अप्रैल से 800 से ज्यादा जरूरी दवाओं के दाम में 11 प्रतिशत की भारी वृद्धि करने की घोषणा पिछले सोमवार को की थी. नेशनल एसेंशियल लिस्ट ऑफ मेडिसिन की संशोधित नीति वर्ष 2013 में लागू हुई थी. उसके बाद से जरूरी दवाओं के दामों में यह अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि (10.76 फीसदी की) है. जरूरी दवाओं के थोक दाम आज से बढ़ गए हैं. जल्द ही इन दवाओं के खुदरा दाम भी बढ़ जाएंगे.

पेनकिलर्स और गैस की दवाएं भी इनमें शामिल

आवश्यक दवाओं की सूची में बुखार, स्किन इन्फेक्शन, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, सर्दी-खांसी, कान-नाक और गले की दवाएं, एंटीसेप्टिक्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, एंटीबायोटिक्स, दर्द और गैस की दवाओं सहित 800 से ज्यादा दवाएं शामिल हैं. इनमें पैरासिटामॉल, एजिथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लॉक्सिन, हाइड्रोक्लोराइड, मेट्रोनिडाजोल,  फेनोबार्बिटोन, फेनिटोइन सोडियम जैसी महत्वपूर्ण सॉल्ट वाली दवाएं हैं. फॉलिक एसिड, विटामिन और मिनरल्स की कमी को दूर करने वाली दवाएं भी इसी श्रेणी में आती हैं.

मेडिसिन की कीमतों में वृद्धि के पीछे की वजह थोक महंगाई में बढ़ोतरी बताई गई है. एनपीपीए आवश्यक श्रेणी की दवाओं के दाम में बढ़ोतरी होलसेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर करता है.

महंगी दवाओं की सूची

पैरासिटामॉल

एजिथ्रोमाइसिन

विटामिन सी की गोलियां

इंसुलिन इंजेक्शन

ओरल सॉल्ट

मल्टीविटामिन टैबलेट

सिप्रोफ्लॉक्सिन

हाइड्रोक्लोराइड

मेट्रोनिडाजोल

फेनोबार्बिटोन

फेनिटोइन सोडियम

फॉलिक एसिड

एंटीबायोटिक्स