भारत में कोरोना का असर फिलहाल बेहद कम है. कोविड केसों में लगातार गिरावट आ रही है. इसे देखते हुए सरकार ने 31 मार्च से ज्यादातर कोरोना पाबंदियां हटा दी हैं. इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने भी बड़ा फैसला लिया है. अब 4 अप्रैल सोमवार से देश की सबसे बड़ी अदालत में फिजिकल हियरिंग यानी प्रत्यक्ष तौर पर सुनवाई शुरू हो जाएगी. चीफ जस्टिस एनवी रमणा ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि वकील अगर पहले से आग्रह करेंगे तो सोमवार और शुक्रवार को उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई का विकल्प दिया जा सकता है.

742 दिन बाद प्रत्यक्ष सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में 742 दिन बाद ये मौका आएगा, जब वकील और वादी अदालत में पेश होकर अपना केस लड़ पाएंगे. कोरोना महामारी की वजह से 24 मार्च 2020 को देश में पहली बार लॉकडाउन लगाया गया था. तभी से सुप्रीम कोर्ट वर्चुअल मोड में काम कर रहा है. हालांकि बाद में कुछ फिजिकल सुनवाई की छूट दे दी गई थी. कोरोना महामारी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल और हाइब्रिड मोड में सुनवाई का फैसला किया था. अक्टूबर 2021 में सर्वोच्च अदालत ने आंशिक रूप से फिजिकल सुनवाई शुरू की थी. बुधवार-गुरुवार को प्रत्यक्ष सुनवाई और सोमवार-शुक्रवार को वर्चुअल हियरिंग हो रही थी. कोरोना केसों को देखते हुए 7 जनवरी 2022 से पूरी तरह वर्चुअल मोड में सुनवाई होने लगी. इसके बाद 14 फरवरी से सप्ताह में दो दिन फिजिकल सुनवाई भी शुरू कर दी गई.

जजों की बैठक में हुआ फैसला

वकीलों और वादकारियों की लगातार मांग को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों ने प्रत्यक्ष सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया है. इसे लेकर बुधवार को चीफ जस्टिस रमणा, जस्टिस यूयू ललित, एएन खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और एलएन राव की बैठक हुई थी. कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के बाद से ही सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन मांग कर रही थी कि अदालत के दरवाजे प्रत्यक्ष सुनवाई के लिए खोले जाने चाहिए. उसका कहना था कि वर्चुअल सुनवाई से भले ही कुछ बड़े वकीलों को फायदा हो रहा हो, लेकिन ज्यादातर छोटे वकील और नई शुरुआत करने वाले वकीलों के लिए यह बड़ी मुसीबत बन गया है. उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है.