मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने एक लाइवस्‍ट्रीम इवेंट में बुधवार को मेटावर्स की एक झलक दिखलाई. जुकरबर्ग ने बताया कि मेटा एआई पावर्ड एक यूनिवर्सल स्‍पीच ट्रांसलेटर मेटावर्स के लिए बना रही है जिसका प्रयोग कोई भी कर सकेगा.

मेटा के मुताबिक इस समय विश्‍व में 2 बिलियन लोगों या विश्‍व के 25 फीसदी लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा के लिए कोई ट्रांसलेशन सिस्‍टम  मौजूद नहीं है. इस समस्‍या के समाधान के लिए मेटा एक प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट का एक चरण नो लैंग्‍वेज लेफ्ट है और दूसरा यूनिवर्सल स्‍पीच ट्रांसलेटर है.

मेटा के एक ब्‍लॉग के मुताबिक नो लैंग्‍वेज बिहाइंड चरण में मेटा एक एडवांस्‍ड एआई मॉडल  जो कम ही उदाहरणों से लैंग्‍वेज सीख जाएगा और फिर इसका प्रयोग सैंकड़ों भाषाओं के क्‍वालिटी ट्रांसलेशन में किया जाएगा. दूसरे चरण में यूनिवर्सल स्‍पीच ट्रांसलेटर का विकास किया जा रहा है. यह किसी भी भाषा को रियल टाइम में ट्रांसलेट कर देगा.

सैंकड़ों भाषाओं में अनुवाद

जुकरबर्ग के मुताबिक पांच साल पहले दर्जन भर भाषाओं में ट्रांसलेशन होता था. तीन साल पहले 30 भाषाओं तक थे और इस साल सैकड़ों भाषाओं को ट्रांसलेट करने का लक्ष्य बना रहे हैं. कंपनी ‘नो लैंग्वेज लेफ्ट बिहाइंड’ नामक एक नया AI मॉडल भी बना रही है जो मौजूदा मॉडलों की तुलना में कम ट्रेनिंग में भी डेटा के साथ नई भाषाएं सीखा सकता है और इसका इस्तेमाल सैकड़ों भाषाओं में एक्सपर्ट क्वालिटी ट्रांसलेशन से भी किया जा सकता है.

मेटावर्स के लिए डिजिटल असिस्टेंट

जुकरबर्ग ने कहा कि वे नई पीढ़ी का स्मार्ट असिस्टेंट (Smart Assistant) बनाने के लिए AI रिसर्च पर काम कर रहे हैं. यह वर्चुअल वर्ल्ड के साथ फिजिकल वर्ल्ड को अग्मेंटेड रियलिटी (AR) के साथ नेविगेट करने में मदद करेगा.

ऐसे करेगा काम

जुकरबर्ग ने कहा कि जब हम चश्मा पहनेंगे तो यह पहली बार होगा जब कोई AI सिस्टम वास्‍तविक दुनिया को हमारे नजरिए से दिखाएगा. उन्हें उम्मीद है कि यह काम AI को मजबूत करने में मदद करेगा. जिससे वर्चुअल से फिजिकल वर्ल्ड में पहुंचने में मदद मिलेगी. मेटा ने प्रोजेक्ट कैराओके नाम की एक नई पहल की भी घोषणा की है, जो ऑन-डिवाइस असिस्टेंट को बनाने के लिए एक एंड-टू-एंड न्यूरल मॉडल है, जो लोगों को वॉइस असिस्टेंस के साथ ज्यादा नेचुरल बातचीत करता है.