भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात ने मुक्‍त व्‍यापार समझौते पर हस्‍ताक्षर कर दिए हैं, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच व्‍यापार को बढ़ावा देना और कम लागत पर उत्‍पादों का आदान-प्रदान करना है. इसका बहुत बड़ा फायदा देश के ज्‍वैलर्स इंडस्‍ट्री को भी होगा और सोना सस्‍ता हो जाएगा.

द बुलियन एंड ज्‍वैलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन योगेश सिंघल का कहना है कि समझौते से दोनों देशों में ज्‍वैलरी का कारोबार बढ़ेगा. भारतीय ग्राहकों को भी सस्‍ती कीमत पर सोने के आभूषण मिलेंगे. समझौते के तहत भारत द्वारा ज्वैलरी निर्यात करने पर दुबई सरकार अब दुबई में लगने वाले 5 फीसदी आयात शुल्क को नहीं वसूलेगी. इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा और ज्‍वैलरी इंडस्ट्री में नए रोजगार पैदा होंगे.

भारतीय ग्राहक के हर तोले पर 500 रुपये बचेंगे

समझौते का दूसरा बड़ा असर दुबई से सोना आयात करने पर होगा. दरअसल, भारत सरकार इस आयात पर 1 फीसदी आयात शुल्क कम वसूल करेगी. यानी आयात शुल्‍क की लागत मौजूदा 7.5 फीसदी से घटकर 6.5 फीसदी रह जाएगी. इससे भारतीय ग्राहकों को सोने के जेवर खरीदने पर 500 रुपये प्रति 10 ग्राम का सीधा फायदा होगा और वे दुबई की जगह भारत से ही ज्‍वैलरी खरीदने को आकर्षित होंगे.

तस्‍करी पर लगेगी लगाम और मजबूत होगा रुपया

योगेश सिंघल ने कहा कि दुबई से सोने का आयात सस्‍ता होने से तस्‍करी पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी. इससे एक ओर तो सरकार के राजस्‍व को नुकसान नहीं होगा और दूसरी ओर इंडस्‍ट्री में भी पारदर्शिता आएगी. सरकार के इस कदम से विदेशी मुद्रा को भारत लाने में भी मदद मिलेगी, जिससे भारतीय मुद्रा मजबूत होगी.

बीते साल आया 70 टन सोना

भारत हर साल करीब 800 टन सोने का आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्‍सा दुबई का होता है. वित्‍तवर्ष 2020-21 में भारत ने यूएई से 70 टन सोने का आयात किया था. मुक्‍त व्‍यापार समझौते के तहत भारत सरकार ने हर साल यूएई से 200 टन सोने के आयात पर कम शुल्‍क वसूलने की छूट दी है.