वाहन और इसके कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना से देश में बंपर नौकरियां मिलेंगी. अगले पांच साल में रोजगार के 7.5 लाख अतिरिक्त मौके बनेंगे. भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव अरुण गोयल का कहना है कि इस योजना से महामारी से उबर रहे ऑटो सेक्टर को भी रफ्तार मिलेगी. उत्पादन के साथ बिक्री में भी उछाल आएगा.

गोयल ने बताया कि पीएलआई योजना के तहत रोजगार के साथ उत्पादन के मोर्च पर भी तेजी आएगी. उत्पादन मूल्य में 2,31,500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि जिन 20 ऑटो कंपनियों को योजना के लिए चुना है, उन्होंने 45,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. यह योजना 25,938 करोड़ रुपये की है, इसलिए हमें उम्मीद है कि इससे 2,31,500 करोड़ रुपये मूल्य का उत्पादन बढ़ेगा.

बुनियादी ढांचा में निवेश से भी मिलेगी राहत

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022 में पांच साल में पीएलआई योजना के माध्यम से देशभर में 60 लाख नौकरियां पैदा होने की बात कही थी. गोयल ने कहा कि पीएलआई योजना के अलावा सरकार बुनियादी ढांचा मजबूत करने पर भी जोर दे रही है. बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भारी-भरकम निवेश की योजना है. इससे भी रोजगार के मोर्चे पर काफी राहत मिलेगी.

आए कुल 115 आवेदन

भारी उद्योग मंत्रालय का कहना है कि योजना के लिए आवेदन खिड़की को 60 दिनों के लिए खोला गया था. 9 जनवरी तक कुल 115 आवेदन आए. इनमें 87 ऑटो कॉम्पोनेंट कैटेगरी और 38 ओईएम, वाहन कैटेगरी के अंतर्गत आए. इनमें से 5 आवेदन दोनों ही कैटेगरी के लिए आए हैं. ओईएम कैटेगरी के अंतर्गत 28 आवेदन में से 20 को योग्य माना गया है.

ई-वाहनों पर सबसे ज्यादा इंसेटिव दे रहा भारत

इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलने वाले इंसेंटिव पर गोयल ने बताया कि भारत इलेक्ट्रिक वाहनों की दुनिया में सबसे बेहतर इंसेंटिव प्रदान कर रहा है. इसके परिणाम स्वरूप आने वाले समय में सड़कों पर बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की वृद्धि देखने को मिलेगी. यह इलेक्ट्रिक वाहनों के इको सिस्टम को बढ़ावा देने में मदद करेगा. ऑटोमोबाइल और ऑटो कॉम्पोनेंट के लिए पीएलआई योजना (25,938 करोड़ रुपये), एसीसी के लिए पीएलआई (18,100 करोड़ रुपये) और फेम योजना (10,000 करोड़ रुपये) भारत को पर्यावरण के दृष्टिकोण से स्वच्छ, सतत, एडवांस और बेहतर इलेक्ट्रिक वाहन आधारित प्रणाली बनाने में मदद करेगा.