वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2022-23 (FY23) के लिए बजट पेश करेंगी. सभी को इंतजार है कि इस बार के बजट में वित्त मंत्री क्या ऐलान करती हैं. वहीं, कोरोना महामारी, बढ़ती लागत और सेमीकंडक्टर की कमी से जूझ रही ऑटो इंडस्ट्री को भी इस बार बजट से काफी उम्मीदें हैं.

RoDTEP दरों को बढ़ाने की मांग

भारतीय ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री की बड़ी एसोसिएशन में से एक ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी एसीएमए (ACMA) केंद्रीय बजट के लिए सरकार को अपनी सिफारिशों में सभी ऑटो पार्ट्स पर एक समान 18 फीसदी की एक समान जीएसटी दर लगाए जाने की डिमांड कर रहे हैं. इसने सरकार से रिसर्च और विकास में निवेश बढ़ाने के लिए एक्सपोर्ट प्रोडक्ट पर शुल्क और टैक्स की छूट यानी आरओडटीईपी (RoDTEP) दरों को बढ़ाने को भी कहा है.

चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है ऑटोमोटिव इंडस्ट्री

एसीएमए के प्रेसिडेंट संजय कपूर ने कहा कि ऑटोमोटिव इंडस्ट्री अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन फिर भी दिलचस्प समय देख रहा है. महामारी के कारण आईटी सेक्टर में नई तकनीक और मोबिलिटी लाने में मदद मिली है. एसीसी बैटरी के लिए पीएलआई योजना, ऑटो और ऑटो घटकों के लिए पीएलआई और फेम-2 योजना के विस्तार पर सरकार द्वारा हाल की नीतिगत घोषणाएं वास्तव में बहुत समय से पेंडिग हैं जिन पर काम किये जाने की जरूरत है.

ऑटो पार्ट्स में बढ़ता जा रहा है नकली और ग्रे मार्केट

कपूर ने कहा कहा कि सभी ऑटो पार्ट्स पर एक समान जीएसटी दर 18 फीसदी की सिफारिश कर रहे हैं. उद्योग में महत्वपूर्ण आफ्टरमार्केट ऑपरेशन होते है जिसमें ज्यादातर पर जीएसटी की दर 28 फीसदी है जिसके कारण ऑटो पार्ट्स में नकली और ग्रे मार्केट बढ़ता जा रहा है. जीएसटी की दर कम करने से इस ग्रे मार्केट को खत्म करने में मदद मिलेगी.