लोग अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए उसे बैंकों में जमा करते हैं. इस पर उन्हें रिटर्न भी मिलता है. क्या आपको पता है कि बैंकों में भी आपका पैसा सुरक्षित नहीं है क्योंकि बैंक खुद ही सुरक्षित नहीं हैं. बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा आपके पैसों पर किसी और की नजर है.

महामारी के दौरान डिजिटल निर्भरता बढ़ने और डिजिटल परिचालन में तेजी से बैंकों व वित्तीय संस्थानों में साइबर धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं. पिछले दो साल में इसमें और तेजी आई है. ऑडिट, कंसल्टिंग, टैक्स और एडवाइजरी सर्विसेज फर्म डेलॉयट इंडिया ने एक सर्वे में कहा आलम यह है कि ये बैंक और वित्तीय संस्थान इससे निपटने के लिए खुद ही जूझ रहे हैं. आगे भी साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं होती रहेंगी.

लोग अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए उसे बैंकों में जमा करते हैं. इस पर उन्हें रिटर्न भी मिलता है. क्या आपको पता है कि बैंकों में भी आपका पैसा सुरक्षित नहीं है क्योंकि बैंक खुद ही सुरक्षित नहीं हैं. बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा आपके पैसों पर किसी और की नजर है.

महामारी के दौरान डिजिटल निर्भरता बढ़ने और डिजिटल परिचालन में तेजी से बैंकों व वित्तीय संस्थानों में साइबर धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं. पिछले दो साल में इसमें और तेजी आई है. ऑडिट, कंसल्टिंग, टैक्स और एडवाइजरी सर्विसेज फर्म डेलॉयट इंडिया ने एक सर्वे में कहा आलम यह है कि ये बैंक और वित्तीय संस्थान इससे निपटने के लिए खुद ही जूझ रहे हैं. आगे भी साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं होती रहेंगी.

अगले दो वर्ष में और बढ़ेंगे मामले

डेलॉयट का यह सर्वे भारत में स्थित विभिन्न वित्तीय संस्थानों के 70 सीनियर अधिकारियों से बातचीत पर आधारित है. ये अधिकारी जोखिम प्रबंधन, लेखा परीक्षण और संपत्ति की वसूली जैसे कार्यों को देखते हैं. सर्वे में शामिल होने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों में प्राइवेट, पब्लिक, विदेशी, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी शामिल हैं. सर्वे में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी और नए डिजिटल परिचालन के कारण बैंक और वित्तीय संस्थान धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सर्वे में 78 फीसदी लोगों ने आशंका जताई कि अगले दो वर्षों में धोखाधड़ी के मामले बढ़ सकते हैं.