सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से सैकड़ों फ्लैट खरीदारों की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं है. यह सैकड़ों फ्लैट खरीदार सुपरटेक की एमराल्ड योजना के ट्विंन टावर से हैं. सुप्रीम कोर्ट 30 अगस्त को अवैध रूप से बने ट्विंन टावर को गिराए जाने का आदेश जारी कर चुका है. फ्लैट खरीदारों को पैसा वापस करने के लिए भी कहा था. लेकिन फ्लैट खरीदारों के मुताबिक बिल्डर पैसा वापस करने में आनाकानी कर रहा है. वहीं नोएडा अथॉरिटी को आदेश दिया है कि वो 17 जनवरी तक टावर गिराए जाने की योजना कोर्ट में जमा कराए.

फ्लैट खरीदार ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई थी यह गुहार

नोएडा के सेक्टर-93ए में सुपरटेक की एमराल्ड योजना के तहत 40 मंजिला ट्विन टावर बने हुए हैं. नियमों को दरकिनार कर अवैध रूप से यह टावर बनाए गए और बाद में उन्हें बेच भी दिया गया. लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट में अवैध ट्विंन टावर का मामला पहुंचा तो 30 नवंबर तक उन्हें गिराए जाने के आदेश जारी कर दिए गए. लेकिन अभी तक टावर टूटे नहीं हैं. वहीं बिल्डर फ्लैट खरीदारों को उनका पैसा वापस करने में टाल मटोल कर रहा है. इस शिकायत को लेकर फ्लैट खरीदार कोर्ट चला गया था.

अभी तक तैयार नहीं हुई है टावर गिराने की योजना

सुप्रीम कोर्ट ने 30 अगस्त को आदेश जारी करते हुए कहा था कि नोएडा अथॉरिटी 30 नवंबर तक दोनों अवैध टावर को गिराए. टावर गिराने का खर्च सुपरटेक कंपनी से ही ले. इसके लिए अथॉरिटी ने सुपरटेक से टावर गिराने की योजना मांगी. बिल्डर ने विदेशी कंपनी की मदद से योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया.

लेकिन सेन्ट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट योजना पर कुछ आपत्ति लगाते हुए तीन सुझाव भी दिए. अब एक बार फिर योजना नए सिरे से तैयार की जाएगी. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को 17 जनवरी तक कोर्ट में टावर गिराए जाने की कार्य योजना जमा कराने के आदेश दिए हैं.