दुनिया के ज्यादातर देश कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के संक्रमण से जूझ रहे हैं. वायरस को फैलने से रोकने के लिए जहां कोरोना के नियमों में सख्ती बरती गई है और लॉकडाउन का सहारा लिया जा रहा है. इस बीच दक्षिण अफ्रीका ने कोरोना की चौथी लहर से पार पाने का ऐलान किया है. दक्षिण अफ्रीका ने तत्काल प्रभाव से नाइट कर्फ्यू को भी हटा दिया है.लोगों के मूवमेंट पर लगी पाबंदी हटाने के साथ सरकार ने यह भी कहा कि कार्यक्रमों में सीमित लोगों को ही एंट्री मिलेगी.

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, देश में टीकाकरण और स्वास्थ्य क्षमताओं के आधार पर महामारी को लेकर जारी प्रतिबंधों में कुछ बदलाव किए गए हैं. सरकारी बयान में कहा गया कि देश में कोरोना के मामले निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. सभी संकेत बता रहे हैं कि देश ने चौथी लहर की आशंका को पार कर लिया है. 25 दिसंबर से नए मामलों की संख्या में 29.7 प्रतिशत की कमी देखी गई है. इनडोर होने वाले कार्यक्रमों में 1000 और बाहर होने वाले कार्यक्रमों में 2000 लोग ही शामिल हो सकते हैं.

क्या कह रहे हैं दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिक?

इन्हीं आंकड़ों को देखते हुए दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिक ओमिक्रॉन पर विश्लेषण पेश कर रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि ओमिक्रॉन के लगभग सभी मरीज हल्की बीमारी के साथ आ रहे हैं. वो इलाज के बाद जल्दी डिस्चार्ज हो रहे हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, डेल्टा वेरिएंट के लहर में जितने गंभीर बीमार लोग मिल रहे थे, ओमिक्रॉन की लहर में ऐसे गंभीर बीमारों के आने का आंकड़ा एक-तिहाई रह गया है.

WHO ने चेताया

इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने बुधवार को कहा कि वह ओमिक्रॉन और डेल्टा वेरिएंट के मिलने से संक्रमण के मामलों की ‘सुनामी’ आने की आशंका को लेकर चिंतित है. WHO चीफ टेडरोस एडनोम गेब्रियासिस ने कहा कि डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट की ऐसी सुनामी आएगी कि हेल्थ सिस्टम तबाही के कगार पर पहुंच जाएगा.