त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने राज्य के कॉलेजों में जरूरत पड़ने पर एचआईवी की लक्षित जांच करने के लिए कहा है. राज्य में लगातार बढ़ रहे एचआईवी मरीजों की संख्या को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है. एक कार्यक्रम के दौरान सीएम देब ने त्रिपुरा में ड्रग्स की समस्या पर भी चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा है कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में महिलाएं अहम बड़ी निभा सकती हैं. त्रिपुरा स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कुल 2459 मरीज हैं. इनमें महिलाओं की संख्या 750 और 1709 पुरुष हैं. राज्य में बीते 20 सालों में एचआईवी के चलते 640 मरीजों की मौत हो चुकी है.

विश्व एड्स दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम ने कहा, ‘मैंने राज्य एंड्स नियंत्रण सोसाइटी की तरफ से तैयार आंकड़ों का अधिकारियों के साथ दोबारा सत्यापन किया है. और जिस तरीके से मामले बढ़ रहे हैं, वह गहरी चिंता का विषय है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को अगर जरूरी लगता है, तो वे कॉलेजों के हर एक छात्र की जांच कर सकते हैं. दुर्भाग्य से राज्य के प्रतिष्ठित कॉलेजों में मामलों की संख्या ज्यादा मिल रही है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘ड्रग्स के रास्तों की पहचान की जानी चाहिए. अगर जरूरत पड़े, तो पुलिस से सहायता के लिए कहा जा सकता है.’ उन्होंने कहा, ‘हर रोज अगरतला के जीबीपी अस्पताल में 2-3 मरीज पॉजिटिव मिल रहे हैं और इनमें कॉलेज छात्रों की संख्या ज्यादा है. यह आंकड़े खतरनाक भविष्य के संकेत दे रहे हैं. हमें त्रिपुरा की जमीन से एचआईवी को खत्म करने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे औऱ वन-टू-वन अवेयरनेस ड्राइव की शुरुआत करनी होगी.’

त्रिपुरा में इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच में 560 मरीज मिले हैं. इंजेक्शन के जरिए ड्रग्स लेने वाले एचआईवी मरीजों की कुल संख्या 860 है. जबकि, इस केवल इस साल 300 नए मरीज मिले हैं. सीएम देब ने जानकारी दी है कि प्रदेश मंत्री परिषद पहले ही उत्तरी त्रिपुरा जिले में राष्ट्रीय ड्रग्स पुनर्वास केंद्र स्थापित करने को लेकर चर्चा कर चुका है. राज्य में जिलावार मरीजों की संख्या इस तरह है. उत्तर त्रिपुरा जिला (594), पश्चिम त्रिपुरा (546), धलाई जिला (408), उनाकोटी (261), खोवई (188), गोमति (183), सिपाहीजाला (137), दक्षिण त्रिपुरा (109).