ओमिक्रॉन को लेकर समूचे देश में हाईअलर्ट हो चुका है. विदेश से लौट रहे यात्रियों की निगरानी की जा रही है. इसी कड़ी में विदेश यात्रा कर पिछले दस दिनों में मेरठ लौटे कुल सभी 209 लोगों की लिस्ट प्रशासन को सौंपी गई है. इन सभी 209 लोगों की कोरोना जांच कराई जा रही है. इन यात्रियों में साउथ अफ्रीका से लौटे सात यात्री भी शामिल हैं. जांच के दौरान अगर कोई यात्री कोरोना पॉज़िटिव पाया जाता है तो उसकी जीनोम स्किवेंसिंग कराई जाएगी.

ये लोग आस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, कनाडा, जर्मनी, जापान, कुवैत, मलेशिया, मालदी, मॉरिशस, नेपाल, नीदरलैंड, न्यूजी़लैंड, पोलैंड, कतर, रुस, सउदी अरब, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, यूएएई, यूके और यूएसए से मेरठ पहुंचे हैं. दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना और हांगकांग से आने वाले यात्रियों पर खास ध्यान दिया जा रहा है.

यूएस से सबसे ज्याद लौटे यात्री

ऑस्ट्रेलिया – 7, बहरीन – 3, बांग्लादेश – 1, कनाडा – 6, जर्मनी – 9, जापान – 4,  कुवैत – 11, मलेशिया – 5, मालदीव – 6, मॉरिशस – 4,  नेपाल – 3,  नीदरलैंड – 2, न्यूज़ीलैंड – 1, पोलैंड – 1, कतर – 17, रुस – 2, सउदी,  अरब – 13,  सिंगापुर – 2,  साउथ अफ्रीका – 7,  श्रीलंका – 1,  यूएई – 45,  यूके – 13,  यूएसए – 46

मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान के अनुसार आठ दिन तक लगातार विदेश से लौटे इन सभी यात्रियों की निगरानी की जाएगी. अगर जांच में कोई भी शख्स कोविड 19 पॉज़िटिव मिलता है तो उसकी जीनोम स्किवेंसिंग कराई जाएगी. उन्होंने बताया कि जीनोम स्किवेंसिंग के ज़रिए ही ओमिक्रॉन का पता चल पाएगा.

तैयारी भी पूरी

मंडलीय सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि ओमिक्रॉन को लेकर मेरठ मेडिकल कॉलेज और एक प्राइवेट अस्पताल में अलग वार्ड भी बना दिए गए हैं. साथ ही ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर ऑक्सीजन प्लांट्स तैयार हैं. इसके लिए सभी 36 प्रभारी चिकित्साधिकारियों के साथ मीटिंग की गई है. निगरानी समितियों को अलर्ट कर दिया गया है. अगर कोई लक्षणयुक्त मरीज मिलता है तो उसकी विशेष जांच होगी. बड़ी संख्या में वीटीएम किट मंगाई गई है. मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलोजी लैब जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच के लिए सैंपल एनआइवी पुणे या पीजीआई लखनऊ भेजेगी.

सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग नए कोरोना वैरिएंट को देखते हुए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर फोकस्ड सैंपलिंग करेगा. अस्पतालों में हेल्थकेयर वर्कर्स एवं हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की भी जांच होगी. वहीं, संस्थानों, रेलवे स्टेशन एवं बस अड्डों पर भी सैंपलिंग की जाएगी.