डिजिटल लेन-देन बढ़ने से तमाम ऐसे मोबाइल ऐप्स आ गए हैं जो अपने स्तर पर लोन दे रहै हैं. इन मोबाइल ऐप्स का फाइनेंशियल कारोबार पूरी तरह से गैर-कानूनी है. देश का शीर्ष बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अब इन्हें कानून के दायरे में लाने पर काम कर रहा है. RBI के एक वर्किंग ग्रुप ने लोन बांटने वाले मोबाइल ऐप्स के खिलाफ कड़े नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है.

RBI के वर्किंग ग्रुप ने इन ऐप्स के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें कहा गया है कि इंडस्ट्री के सभी स्टेकहोल्डर्स से मिलकर एक नोडल एजेंसी बनाई जाए. नोडल एजेंसी इनका वेरिफिकेशन करेगी. साथ ही एक सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) भी बनाने का सुझाव दिया गया है. एसआरओ में डिजिटल लेडिंग इकोसिस्टम में मौजूद सभी कंपनियां शामिल हो.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जनवरी में अपने कार्यकारी निदेशक जयंत कुमार दास की अध्यक्षता में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप (mobile apps) सहित डिजिटल ऋण पर एक कार्य समूह का गठन किया था. आरबीआई ने यह कदम जबरदस्ती कर्ज वसूली की बढ़ती घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए उठाया था.

इस कार्य समूह ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि एक नोडल एजेंसी की स्थापना की जाए जो कर्ज देने वाली कंपनियों की बैलेंस शीट और कर्ज मुहैया कराने वाले डिजिटल ऐप की तकनीकी साख को सत्यापित करेगी. यह ग्रुप अपनी वेबसाइट पर सत्यापित ऐप्स का एक पब्लिक रजिस्टर भी बनाकर रखेगा.

कार्य समूह की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी से 28 फरवरी के बीच भारतीय Android यूजर्स के लिए लगभग 1,100 उधार देने वाले ऐप्स उपलब्ध थे. इनमें से 600 अवैध थे.

कार्य समूह ने डिजिटल लोन से जुड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए अलग से एक कानून बनाने का भी सुझाव दिया है. इसके अलावा कमेटी ने कुछ टेक्नोलॉजी से जुड़े मानक और दूसरे नियम भी तय करने का सुझाव दिया है, जिसका पालन डिजिटल लोन सेगमेंट में उतरने वाली हर कंपनी को करना होगा.