भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने करंट अकाउंट को लेकर नियमों में ढील दी है. केंद्रीय बैंक के नए नियमों के तहत बैंक अब उन उधारकर्ताओं के भी करंट अकाउंट खोल सकते हैं, जिन्होंने बैंकिंग सिस्टम से कैश क्रेडिट यानी सीसी या ओवरड्राफ्ट यानी ओडी के जरिए कर्ज सुविधा ले ली है. हालांकि इसके लिए शर्त यह है कि यह कर्ज 5 करोड़ रुपये से कम होना चाहिए.

केंद्रीय बैंक ने इंडियन बैंक एसोसिएशन यानी आईबीए और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से मिले सुझावों के बाद नियमों में यह बदलाव किया है. इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने लोन से जुड़े फ्रॉड के मामलों में कमी लाने के लिए अगस्त 2020 में करंट अकाउंट से जुड़ नियमों को कड़ा कर दिया था. रिजर्व बैंक ने बैंकों को उन ग्राहकों का करंट अकाउंट खोलने पर रोक लगा दी थी, जिन्होंने दूसरे बैंकों से कर्ज ले रखा है और वे सभी ट्रांजैक्शन सीसी या ओडी सुविधा वाले अकाउंट से हुए हैं.

दूसरे बैंकों से कर्ज लेने वालों को भी मिलेगी सुविधा

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया, “यह फैसला लिया गया है कि बैंक उन कर्जदारों के करंट अकाउंट खोल सकते हैं, जिन्होंने बैंकिंग सिस्टम से यानी दूसरे बैंकों से कैश सीसी या ओडी के रूप में मिलने वाले कर्ज सुविधाओं का लाभ उठाया है.” 5 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज होने पर बैंक को बताना होगा

जिन उधारकर्ताओं ने 5 करोड़ से कम कर्ज लिया हुआ है, उनके लिए करंट अकाउंट खोलने पर या बैंकों द्वारा सीसी/ओडी सुविधा के प्रावधान पर कोई प्रतिबंध नहीं है. हालांकि इसके लिए उधारकर्ताओं को बैंक को अंडरटेकिंग देनी होगी कि जब भी उनके ऊपर बैंकिंग सिस्टम से लिए गए कर्ज की सीमा 5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा पहुंचेगी, वह बैंक को सूचित करेंगे.