RBI के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने शुक्रवार को NBFC संस्थाओं से ग्राहकों की सुरक्षा को अत्यधिक महत्व देने और उसे पुख्ता बनाने को बोला है. राव ने कहा है कि यह एक ऐसा मुद्दा है, जिससे कि समझौता नहीं किया जा सकता है.

कुछ NBFC संस्थानों के द्वारा जबरदस्ती वसूली घटनाओं को याद करते हुए राव ने कहा कि, पूरी तरह से व्यावसायिक विचारों से प्रेरित इस तरह के कार्यों ने पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है जो की विश्वास पर पनपती है.

CII द्वारा आयोजित NBFC के शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए RBI के डिप्टी गवर्नर ने यह कहा कि, NBFC संस्थानों को अपने व्यापारिक या कम समय के फायदे के लिए इस तरह के कार्यों से बचना चाहिए. अगर वे ग्राहकों के साथ विश्वास के आधार पर संबंध बनाते हैं तो, वे लंबे समय तक इससे अधिक लाभ उठा सकते हैं.

RBI को जबरन वसूली, डेटा गोपनीयता का उल्लंघन, धोखाधड़ी वाले लेनदेन में वृद्धि, साइबर अपराध, अत्यधिक ब्याज दर और उत्पीड़न से जुड़ी कई सारी शिकायतें मिल रही हैं. ग्राहकों की सुरक्षा एक ऐसा मुद्दा है, जिसके साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है. हम RBI में शिकायत निवारण तंत्र को स्थापित करना, RBI लोकपाल योजना जैसे कदमों के जरिए सार्वजनिक हित के लिए अपना सबसे बेहतर प्रयास कर रहे हैं.

इसके अलावा RBI के डिप्टी गवर्नर ने यह भी कहा कि, आंतरिक लोकपाल को चुनिंदा आधार पर NBFC तक बढ़ा दिया गया है. NBFC के आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र में यह लोकपाल पूर्ण या आंशिक रूप से खारिज की गई शिकायतों के मामले में NBFC द्वारा प्रदान किए गए समाधान की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करेगा.

मौजूदा वक्त में 12 अलग अलग श्रेणियों में 9,651 एनबीएफसी हैं जो उत्पाद, ग्राहक और भौगोलिक आधार पर अलग अलग सेट पर केंद्रित हैं. 31 मार्च, 2021 तक, NBFC क्षेत्र (हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों सहित) के पास 54 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति थी. जो कि बैंकिंग क्षेत्र की संपत्ति के लगभग 25 फीसद के बराबर है. पिछले पांच वर्षों में NBFC क्षेत्र की संपत्ति 17.91 फीसद की औसत वृद्धि दर से बढ़ी है.