भारत का शेयर बाजार मार्केट वैल्यू के मामले में ब्रिटेन को पीछे छोड़ने के करीब आ गया है. जल्द ही इंडियन इक्विटी मार्केट दुनिया के टॉप-5 मार्केट वैल्यू वाले क्लब में शामिल हो सकता है. रिकॉर्ड लो इंट्रेस्ट रेट और रिटेल निवेश भारत के स्टॉक मार्केट को रिकॉर्ड हाई पर ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण रोल निभा रहे हैं.

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन इस साल 37% बढ़कर 3.46 ट्रिलियन डॉलर हो गया है. वहीं, ब्रिटेन का मार्केट कैप इस साल 9% बढ़कर 3.59 ट्रिलियन डालर तक पहुंचा गया है. यदि secondary listings और depositary receipts देखें तो यह आकंड़ा काफी महत्वपूर्ण है.

भारत कई मायनों में ब्रिटेन से आगे

भारत और ब्रिटेन के मार्केट की तुलना करने पर कई मायनों में भारत आगे दिख रहा है. भारत की उच्च विकास क्षमता और active technology area के कारण देश में तेजी से स्टार्टअप बढ़ रहे हैं. इससे मार्केट को फायदा मिल रहा है. यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में चीन से निवेश में बड़ी कमी आई है. वहीं, ब्रिटेन के लिए Brexit से जुड़ा मामला मार्केट को प्रभावित कर रहा है.

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन स्टार्टअप्स तेजी से विकास कर रहे हैं. आने वाले दिनों में इनका आकार काफी बड़ा हो जाएगा. 2021 में अब तक इंडियन स्टार्टअप्स ने IPO के जरिए 10 बिलियन डॉलर यानी 75 हजार करोड़ से ज्यादा का फंड इकट्ठा किया है.

माना जा रहा है कि अगले दो सालों तक आईपीओ का बाजार इसी तरह गरम रहेगा. आने वाले 36 महीनों में कम से कम 150 कंपनियों के बाजार में लिस्ट होने की पूरी उम्मीद है. इन कंपनियों का टोटल मार्केट कैप 400 बिलियन डॉलर के करीब होगा. जाहिर है इससे BSE के टोटल मार्केट कैप में बहुत ज्यादा उछाल आएगा.