देश में ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में जिस तेजी से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ है, उसके लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में इकोनामी में सुधार की गति पर भी असर पड़ने की आशंका है. पेट्रोलियम उत्पादों के साथ ही कोयला और गैस की कीमतों में भारी इजाफे ने नीति निर्धारकों के माथे पर ¨चिंता की लकीरें खींच दी हैं. वित्त मंत्रालय के स्तर पर ऊर्जा कीमतों की निगरानी हो रही है.

इसका असर आरबीआइ की इस हफ्ते होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा पर भी दिखाई देने की संभावना है. हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया गया है कि भारत में चीन जैसा बिजली संकट पैदा होने की आशंका नहीं है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें पिछले सात वर्षों के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 81.51 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गई है जो वर्ष 2014 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. सरकारी तेल कंपनियों का कहना है की घरेलू बाजार में कीमतें और बढ़ेंगी. कच्चे तेल के साथ ही प्राकृतिक गैस की कीमतें भी अतंरराष्ट्रीय बाजार में सात वर्षों के उच्चतम स्तर पर हैं. चीन, ब्रिटेन व दूसरे यूरोपीय देशों की तरफ से भारी मांग है.