रेलवे की तरफ से ज़ल्द ही त्योहारों को देखते हुए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक आने वाले 10 अक्टूबर से 21 नवंबर तक स्पेशल ट्रेनों की क़रीब 1500 ट्रिप्स चलाई जा सकती हैं. हालांकि आम दिनों में या कोविड से पहले यह आंकड़ा 5000 के पार हुआ करता था. दरअसल कोविड का बहुत बुरा असर भारतीय रेलवे पर भी हुआ है. रेलवे में लगातार मुसाफिरों की कमी देखी जा रही है. दशहरे से लेकर छठ तक का पिछला त्यौहारी सीज़न भी रेलवे के लिए बहुत बुरा गुज़रा है.

यह देखा गया है कि 8-10 घंटे के सफर के लिए बहुत से लोग निज़ी गाड़ियों का  इस्तेमाल करना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं. लेकिन कोविड का प्रकोप कम होने और रिकार्ड वैक्सिनेशन की वजह से यह तस्वीर बदल सकती है. रेलवे को उम्मीद है कि त्यौहारों के साथ ही ट्रेनों में भी पुरानी चमक एक बार फिर से लौट सकती है.

वहीं दशहरे का त्योहार 7 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, लेकिन अब तक सीज़न की स्पेशन ट्रेनों का ऐलान नहीं होने के पीछे भी बड़ी वजह है. सूत्र बताते हैं कि रेलवे पर माल गाड़ियों को चलाने का भारी दबाव है. ख़ासकर देशभर के पॉवर प्लांट में कोयले की सख़्त जरूरत ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है. दशहरे लेकर छठ तक ट्रेनों की सबसे ज़्यादा मांग Iपूर्वी भारत के लिए होती है.

वहीं पूर्वी भारत के झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से कोयले की ढुलाई सबसे ज़्यादा होती है ऐसे में रेलवे लाइन पर किसे प्राथमिकता दी जाए, इसने संकट को और गहरा कर दिया है. हालांकि उम्मीद की जा रही है कि आने वाले एक-दो दिनों में इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा और स्पेशल ट्रेनों का ऐलान हो जाएगा.