अफगानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में पहली बार गवाही के लिए पेश हुए अमेरिकी शीर्ष सैन्य अधिकारी ने मंगलवार को खुलासा किया कि कई बार वॉर्निंग दिए जाने के बाद भी बाइडन ने ये फैसला लिया. ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल मार्क मिले ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति जो बाइडन को सलाह दी थी कि अफगानिस्तान में कुछ 2500 के आसपास सैनिकों को स्टैंडबाय में रखना चाहिए.
इतना ही नहीं, जनरल मार्क मिले ने यह भी आशंका जाहिर की थी कि तालिबान ने अल-कायदा के साथ पूरी तरह अपने संबंधों को तोड़ा नहीं है. सैन्य अधिकारी ने अफगान में बीते 20 सालों की जंग को ‘रणनीतिक विफलता’ करार दिया. मार्क मिले ने सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति से कहा कि यह उनकी निजी राय है कि काबुल में सरकार को गिरने और तालिबान के शासन को वापस आने से रोकने के लिए अफगानिस्तान में कम से कम 2500 सैनिकों को तैनात रखने की जरूरत थी.
बता दें, मिले ने उस युद्ध को ‘रणनीतिक विफलता’ बताया जिसमें 2461 अमेरिकियों की जान गई है. उन्होंने 15 अगस्त को अफगानिस्तान की राजधानी पर तालिबान के कब्जे को लेकर कहा, ‘काबुल में दुश्मन का शासन है.’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी नाकामी शायद यह रही कि अफगानिस्तान के बलों को अमेरिका के सैनिकों और प्रौद्योगिकी पर अधिक निर्भर रखा गया.