इस बार सर्दियों में एक बार फिर ‘स्मॉग संकट’ की आशंकाओं के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पंजाब-दिल्ली-उत्तर प्रदेश-हरियाणा के साथ बैठक की है. बैठक में चारों राज्यों के संबंधित मंत्री मौजूद थे. बैठक के दौरान पराली जलाने से रोकने के लिए विशेष एहतियात बरतने पर बातचीत हुई है. पर्यावरण मंत्रालय में सचिव आरपी गुप्ता ने कहा, ‘हम वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं.’

आरपी गुप्ता ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी किए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स के नए मानकों पर भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, ‘हम WHO रिपोर्ट की समीक्षा कर रहे हैं. वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयासों के तहत हम पुराने मानकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बाद नए मानकों पर भी काम किया जाएगा.’

बता दें, इससे पहले बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लोबल एयर क्वालिटी इंडेक्स की गाइडलाइंस में बदलाव किए हैं. वैश्विक संगठन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अब मानकों को और सख्त कर दिया है. WHO की गाइडलाइंस में स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि प्रदूषित हवा का मानवीय स्वास्थ्य पर कितना बुरा प्रभाव होता है. इसी के मद्देनजर प्रदूषण के मानकों को सख्त किया गया है.

दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया टेडरॉस अधानोम गेब्रेयेसुस ने कहा, ‘वायु प्रदूषण दुनिया के सभी देशों में स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है. लेकिन इसका सर्वाधिक असर गरीब और मध्यम आय वाले देशों पर पड़ता है. नई गाइडलाइंस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तय की गई हैं. मैं सभी देशों से आग्रह करता हूं कि इनका पालन कर वो सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करें.’

नई गाइडलाइंस के मुताबिक सालाना PM2.5 का औसत 5 ug/m3 होना चाहिए. इससे पहले 2005 में ये सीमा 10 ug/m3 की गई थी. वहीं PM10 का सालाना औसत 15 ug/m3 कर दिया गया है जो पहले 20 ug/m3 था.