केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार  देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्‍योरेंस कॉरपोरेशन के आईपीओ को पेश करने से पहले विदेशी निवेश की अनुमति देने की योजना बना रही है. हालांकि, इस बीच जानकारी मिली है कि केंद्र चीन को एलआईसी के आईपीओ में निवेश करने की मंजूरी  नहीं देगा. इसके लिए सरकार खास योजना बना रही है. दरअसल, सरकार का मानना है कि एलआईसी जैसी कंपनियों में चीन की ओर से किया जाने वाला निवेश जोखिम पैदा कर सकता है.

मोदी सरकार चीनी निवेशकों को एलआईसी में शेयर खरीदने से रोकना चाहती है. इसलिए एलआईसी के आईपीओ में निवेश से पैदा होने वाले जोखिम को देखते हुए सरकार चीनी कंपनियों पर पाबंदी लगाने को लेकर विचार-विमर्श कर रही है. हालांकि, अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है. सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए संघर्ष के बाद से भारत लगातार चीन के खिलाफ सख्‍त कदम उठा रहा है. इसके तहत चीन से आयात होने वाले उत्‍पादों पर एंटी डंपिंग चार्ज लगा रहा है. इसके अलावा कई चीनी मोबाइल ऐप्‍स पर भी पाबंदी लगाई गई. साथ ही कई परियोजनाओं को लेकर हुए समझौते खत्‍म कर दिए गए.

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और एलआईसी की ओर से आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय ने भी अब तक कुछ नहीं कहा है. हालांकि, एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि लद्दाख सीमा पर हुई झड़प के बाद चीन के साथ पहले की तरह कारोबार जारी नहीं रखा जा सकता है. चीन पर भारत का भरोसा घटा है. उन्‍होंने कहा कि ऐसे में चीन को एलआईसी आईपीओ में निवेश से रोके जाने की पूरी उम्‍मीद है. बता दें कि सरकार मार्च 2022 के अंत तक एलआईसी आईपीओ पेश कर देगी. सरकार इसके जरिये अपनी 5 से 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. इससे करीब 1 लाख करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है. साथ ही एलआईसी को सूचीबद्ध भी कराया जाएगा.