संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान को लेकर जारी बहस में भारत ने बताया कि पड़ोसी मुल्क में हालात नाजुक बने हुए हैं और तत्काल मानवीय सहायता का आह्वान किया है. साथ ही भारत ने अफगान महिलाओं की बातों को सुने जाने की जरूरत को दोहराया है. हाल ही में तालिबान ने अफगानिस्तान में अंतरिम सरकार का ऐलान किया है. पहले संकेत दिए जा रहे थे कि मुल्क की सरकार में महिलाओं की भी हिस्सेदारी होगी, लेकिन कार्यवाहक सरकार में किसी महिला का नाम शामिल नहीं है. खबर है कि सत्ता में केवल पुरुषों के ही शामिल होने के बाद विरोध और तेज हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस त्रिमूर्ति ने कहा, ‘अफगानिस्तान में नाजुक हालात बने हुए हैं. उसके पड़ोसी और लोगों के दोस्त होने के चलते मौजूदा स्थिति हमारे लिए सीधी चिंता का विषय है.’ इस दौरान उन्होंने मुल्क में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा की भी बात कही और इसे लेकर यूएन तक पहुंच की जरूरत का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, ‘बीते दो दशकों में बनाए लाभों को बनाए रखने के साथ-साथ अफगानों के भविष्य को लेकर बहुत अनिश्चितताएं हैं.’

त्रिमूर्ति ने कहा, ‘इसके संबंध में हम अफगान महिलाओं की आवाज को सुने जाने की जरूरत, अफगान बच्चों की आकांक्षाओं को पूरा करने और अल्पसंख्यकों की हितों की रक्षा करने की बात को दोहराते हैं. हम तत्काल मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आह्वान करते हैं और इसके संबंध में यूएन और अन्य एजेंसियों तक निर्बाध पहुंच की जरूरत को सामने रखते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘भारत अफगान समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले अफगानिस्तान में समावेशी व्यवस्था का आह्वान करता है. समावेशी राजनीतिक समझौते से हासिल हुआ एक व्यापक, समावेशी और प्रतिनिधि गठन अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और वैधता प्राप्त करेगा.’

नए शासन में अधिकारों की वकालत कर रहे तालिबान ने महिलाओं पर जुल्म जारी रखे हैं. खबर है कि बुधवार को भी प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ मारपीट की. मंगलवार को तालिबान ने सभी पुरुष मंत्रियों वाली अंतरिम सरकार का ऐलान किया था. इसके 33 में से 14 सदस्य UNSC के आतंकवाद से जुड़ी ब्लैकलिस्ट में शामिल हैं. कहा जा रहा है कि महिलाएं तालिबान से अधिकारों के वादे को बरकरार रखने की अपील कर रही है और सरकार में उच्च पदों पर महिलाओं की नियुक्ति की मांग कर रही हैं.