सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को खरीदने के लिए निवेशकों के लिए बोली लगाने की समय सीमा 15 सितंबर ही रहेगी. एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. अब तक पांच बार प्रारंभिक बोलियों के लिए समय सीमा का विस्तार किया जा चुका है. साल्ट-टू-सॉफ्टवेयर समूह टाटा समूह उन ‘कई’ संस्थाओं में से था, जिन्होंने पिछले साल दिसंबर में घाटे में चल रही एयर इंडिया को खरीदने के लिए प्रारंभिक बोलियां लगाई थीं.

प्रारंभिक बोलियों का विश्लेषण करने के बाद योग्य बोलीदाताओं को उचित समझ विकसित करने के लिए एयर इंडिया के वर्चुअल डेटा रूम (वीडीआर) तक पहुंच दी गई, जिसके बाद निवेशकों के प्रश्नों का उत्तर दिया गया.

उसके बाद अप्रैल में सरकार ने वित्तीय बोलियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की थी और बोली लगाने की समय सीमा 15 सितंबर तय की थी. अधिकारी ने कहा कि 15 सितंबर तक बोलियां आने के बाद सरकार आरक्षित मूल्य पर फैसला करेगी. डील दिसंबर के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. जुलाई में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री वी के सिंह ने संसद को बताया था कि एयरलाइन के लिए वित्तीय बोलियां 15 सितंबर तक ली जाएंगी.

सरकार एयर इंडिया में अपनी पूरी 100 फीसद हिस्सेदारी बेच रही है जो 2007 में घरेलू ऑपरेटर इंडियन एयरलाइंस के साथ विलय के बाद से घाटे में है. महामारी के कारण हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया में देरी हुई और सरकार ने एयरलाइन के लिए प्रारंभिक बोलियां जमा करने की समय सीमा पांच बार बढ़ा दिया.

एयर इंडिया 1932 में एक मेल कैरियर के रूप में शुरू हुई थी, सफल बोलीदाता को घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट के साथ-साथ विदेशों में हवाई अड्डों पर 900 स्लॉट का नियंत्रण देगी. इसके अलावा बोली लगाने वाले को कम लागत वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस का 100 फीसद और एआईएसएटीएस का 50 फीसद मिलेगा, जो प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर कार्गो और ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं देता है.