अफगानिस्तान में जल्द ही तालिबान की सरकार का औपचारिक ऐलान हो सकता है. खबर है कि इसी बीच सरकार में महिलाओं की कम भागीदारी के खिलाफ और काम करने के अधिकार को लेकर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान करीब 50 अफगान महिलाएं हाथ में तख्तियां लेकर विरोध में नारे लगाते हुए नजर आईं. हालांकि, तालिबान ने दावा किया है कि नए शासन में महिलाएं अपना काम जारी रख सकेंगी. 2001 से पहले पुराने दौर में तालिबान ने इस्लामिक कानूनों के पालन में हिंसा और क्रूरता दिखाई थी. उस दौरान महिलाओं की शिक्षा और काम करने पर प्रतिबंध था.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शन कर रहीं एक महिला ने बताया कि वे चाहती हैं कि तालिबान महिलाओं को भी कैबिनेट में शामिल करे. उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि तालिबान हमारे साथ विचार-विमर्श करे. हमें उनके समारोह और कार्यक्रमों में महिलाएं नजर नहीं आईं.’ प्रदर्शनों की गवाह बनीं एएफपी की पत्रकार के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का कहना था, ‘शिक्षा, काम और सुरक्षा हमारा अधिकार है. हम डरते नहीं हैं, हम एक हैं.’

अलजजीरा के मुताबिक, तालिबान से महिलाओं के काम करने के अधिकार को लेकर जवाब नहीं मिलने पर प्रदर्शनकारी गुरुवार को सड़कों पर उतरे थे. एक 24 वर्षीय महिला ने कहा कि उन्हें और अन्य महिलाओं को काम पर वापिस नहीं आने के लिए कहा गया है. साथ ही जब महिलाएं पश्चिमी अफगानिस्तान के सबसे बड़े शहर में दफ्तरों में लौटी, तो उन्हें वापस कर दिया गया. महिला ने बताया कि हेराती महिलाओं के एक समूह ने तालिबान के शीर्ष अधिकारियों से महिलाओं के अधिकारों को लेकर नीतियों पर सफाई मांगी थी, लेकिन उन्हें कभी भी सही जवाब नहीं मिला.

बता दें, एक इंटरव्यू के दौरान तालिबान के वरिष्ठ नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई ने बताया था कि महिलाएं अपना काम जारी रख सकती है. उनके लिए भविष्य की सरकार या किसी शीर्ष पर पद पर ‘शायद’ जगह न हो. तालिबान के पुराने शासन में वे भी एक कट्टरपंथी थे. टीवी पर तालिबान के नेता का इंटरव्यू करने वाली अफगानिस्तान की पहली महिला पत्रकार बेहेस्ता अरघंद डर के कारण देश छोड़कर निकल चुकी हैं.

उन्होंने कतर में एएफपी को बताया कि अफगानिस्तान में महिलाएं ‘बहुत बुरी स्थिति में हैं.’ ‘मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहना चाहती हूं कि अफगान महिलाओं के लिए आप जो कर सकते हैं, करें.’