कट्टरपंथी अलगाववादी तथा हुर्रियत (जी) के पूर्व प्रमुख सैय्यद अली शाह गिलानी का बुधवार देर रात निधन हो गया. वे 92 वर्ष के थे. बुधवार दोपहर को सांस लेने में दिक्कत तथा सीने में जकड़न की शिकायत के बाद चिकित्सकों ने घर में ही उनकी देखभाल की. देर रात लगभग साढ़े 10 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया. वे 2008 से लगातार हैदरपोरा स्थित आवास पर नजरबंद थे.

बता दें, 92 वर्षीय गिलानी की सोच हमेशा भारत विरोधी रही थी, उन्होंने जून 2020 में हुर्रियत को छोड़ दिया था. हुर्रियत का गठन 90 के दशक में हुआ था. अलगाववादी नेता गिलानी पर कई मामले भी दर्ज थे. उनका पासपोर्ट भी रद्द किया जा चुका था. गिलानी पर हवाला फंडिग, सीमा पार आतंकी कमांडरों से पैसे लेकर उसे आगे कश्मीर में आग भड़काने के लिए इस्तेमाल करने में भी उनकी भूमिका रही थी. NIA, ईडी ने इन मामलों की जांच की थी जिसमें गिलानी के दामाद से भी पूछताछ हुई थी. वे 1972, 1977 व 1987 में वे सोपोर से विधायक रहे है.

वही, आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि पूरी घाटी में पाबंदियां लगाने के साथ ही मोबाइल इंटरनेट सेवा स्थगित कर दी गई है.

गिलानी के निधन के बाद पूरी घाटी में अलर्ट कर दिया गया. पुलिस तथा सुरक्षा बलों की संवेदनशील स्थानों पर तैनाती कर दी गई है. सभी जिलों के एसएसपी को कानून व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी गई है. गिलानी के परिवार वाले चाहते हैं कि श्रीनगर के शहीदी कब्रगाह में उन्हें दफनाया जाए, लेकिन उन्हें हैदरपोरा में दफनाए जाने की उम्मीद है. उधर, उत्तरी कश्मीर के लोगों से संयम बरतने की पुलिस ने अपील की है. लोगों से श्रीनगर की ओर न जाने की सलाह दी है.

वही, उनके निधन पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती व पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने संवेदना प्रकट की है. महबूबा ने ट्वीट किया कि  गिलानी साहब के निधन की खबर से दुखी हूं. हम ज्यादातर बातों पर सहमत नहीं हो सकते हैं, लेकिन मैं उनकी दृढ़ता और उनके विश्वासों के साथ खड़े होने के लिए उनका सम्मान करती हूं. अल्लाहताला उन्हें जन्नत और उनके परिवार तथा शुभचिंतकों के प्रति संवेदना प्रदान करें.