भारत के साथ भविष्य में अपने रिश्तों का संकेत देते हुए ताबिलान के एक शीर्ष नेता ने कतर की राजधानी दोहा में कहा कि भारत, उपमहाद्वीप के लिए बहुत मायने रखता है और तालिबान पहले की तरह ही भारत के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक और व्यापारिक रिश्ते बरकरार रखना चाहेगा. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ये बयान दोहा में तालिबान कार्यालय के डिप्टी हेड शेर मोहम्मद अब्बास स्तानकजई ने दिया है. स्टैनकजई ने शनिवार को तालिबान के सोशल मीडिया अकाउंट और अफगानिस्तान के मिल्ली टेलीविजन पर 46 मिनट के एक वीडियो पर भारत के साथ तालिबान के रिश्तों पर अपनी बात रखी.

तालिबान नेता का ये बयान बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान के रिश्ते ताालिबान के साथ बेहद घनिष्ठ हैं, और इस्लामाबाद भारत के साथ अफगानिस्तान के मजबूत संबंधों को अपने नकारात्मक तौर पर देखता रहा है. साथ ही 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान के किसी वरिष्ठ नेता का यह पहला बयान है, जिसमें सीधे तौर पर भारत के साथ रिश्तों पर बात की गई है. बता दें कि भारत की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफगानिस्तान पर अपने बयान में तालिबान का संदर्भ नहीं दिया और कहा कि अफगान समूह आतंकियों का समर्थन न करें और ना ही किसी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल होने दें.

बता दें कि स्टैनकजई ने 1980 में अफगान आर्मी कैडेट के रूप में देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग ली थी. 1996 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने केयर टेकर सरकार में उप विदेश मंत्री का कार्यभार संभाला था. स्टैनकजई का बयान उस समय आया है, जब भारत ने काबुल से अपने सभी राजनयिकों को वापस बुला लिया है और काबुल स्थित दूतावास को खाली कर दिया गया है.

स्टैनकजई ने कहा, “उपमहाद्वीप के लिए भारत बेहद महत्वपूर्ण है. हम पहले की तरह ही भारत के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं. हम भारत के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को महत्व देंगे और उन्हें बनाए रखना चाहेंगे. हम इस संदर्भ में भारत के साथ काम करने के बारे में विचार कर रहे हैं.”