दो हफ्ते पहले तक ब्रिटेन में हर तरफ कोरोना का कहर था. वो भी ऐसे देश में जहां ज्यादातर लोगों ने वैक्सीन की डोज़ ले ली थी. लिहाज़ डर इस बात का लग रहा था कि कहीं कोरोना की लहर दुनिया के कुछ और देशों में न फैल जाए. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. ब्रिटेन में कोरोना के केस लगातार घट रहे हैं. लेकिन उधर अमेरिका में कोरोना के नए मामलों में लगातार इज़ाफा देखा जा रहा है. यहां ज्यादातर लोग डेल्टा वेरिएंट के शिकार हो रहे हैं. ऐसे में अमेरिका समेत दुनिया के बाकी देशों की निगाहें ब्रिटेन पर टिकी हैं. वो ये जानना चाहते हैं कि आखिर कैसे वहां कोरोना के मरीज़ों की संख्या में गिरावट आने लगी है.

आखिर ब्रिटेन में कोरोना के केस कैसे घटने लगे, इस बात को लेकर एक्सपर्ट्स के पास कोई एक जवाब नहीं है. उनका कहना है कि इस गिरावट के पीछे कई वजहें हैं. लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में यूरोपियन पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर मार्टिन मैककी ने कहा, ‘ये उल्लेखनीय रूप से तेजी से गिरावट है. लोगों को इसकी उम्मीद नहीं थी. कुल मिलाकर, ये थोड़ा रहस्य है.’

ब्रिटेन में 17 जुलाई को कोरोना के नए मरीजों की संख्या 55 हज़ार आई थी. लेकिन इस हफ्ते ये गिरकर 25 हज़ार पर पहुंच गई है. ब्रिटेन में करीब 57 फीसदी लोगों को वैक्सीन की एक डोज़ लग चुकी है. जबकि अमेरिका और यूरोप के दूसरे देशों में ये संख्या 50 परसेंट तक है. उधर भारत में जहां डेल्टा वेरिएंट के ज्यादातर केस मिल रहे थे वहां भी नए केस में गिरावट दर्ज की जा रही है. भारत में मई के महीने में एक दिन में 4 लाख तक केस पहुंच गए थे.

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के एक वायरोलॉजिस्ट डेविड मैथ्यूज के अनुसार ब्रिटेन में डेल्टा वेरिएंट ने संभवत यूके में लगभग सभी को संक्रमित कर दिया, जिन्हें अभी तक टीका नहीं लगाया गया था. लेकिन इससे कोई हर्ड इम्यूनिटी नहीं बनी. उनका कहना है कि डेल्टा वेरिएंट से ज्यादातर युवा संक्रमित हो रहे हैं. दरअसल 18 साल से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन नहीं लग रही है.