आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने केंद्र सरकार को लिखा है कि कर्ज में डूबी वोडाफोन आइडिया (Vi) को किसी चीनी निवेशक की तलाश है. उन्‍होंने लिखा है कि विदेशी निवेशक भारतीय टेलिकॉम मार्केट में 3 कंपनियों को लेकर सरकार का स्‍पष्‍ट रुख जानना चाहते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बिड़ला ने कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गाबा को लिखी चिट्ठी में कहा है कि वह वोडाफोन-आइडिया में अपनी प्रमोटर हिस्सेदारी छोड़ने को तैयार हैं.

बता दें, कुमार मंगलम बिड़ला ने चिट्ठी में कहा है कि वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (VIL) का वजूद बचाने के लिए वह अपनी हिस्सेदारी किसी भी सरकारी या घरेलू फाइनेंशियल कंपनी को सौंपने को तैयार हैं. बता दें कि वह वोडाफोन इंडिया के प्रमोटर और चेयरमैन हैं. उनकी इस कंपनी में 27 फीसदी और ब्रिटिश कंपनी वोडाफोन पीएलसी की 44 फीसदी हिस्सेदारी है. कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप 24,000 करोड़ रुपये है. दोनों प्रमोटर्स ने कंपनी में नया निवेश नहीं करने का फैसला लिया है. वोडाफोन पीएलसी पहले ही कंपनी में अपने पूरे निवेश को बट्टे खाते में डाल चुकी है. वोडाफोन इंडिया पर करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है.

वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के बोर्ड ने सितंबर 2020 में 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की घोषणा की थी. हालांकि, सरकारी मदद के बिना कोई भी निवेशक कंपनी में नया निवेश करने को तैयार नहीं है. बिड़ला ने गाबा को लिखे पत्र में कहा है कि अगर सरकार किसी कंपनी को इसे चलाने में सक्षम मानती है तो वह उसे अपनी हिस्सेदारी देने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों में भरोसा जगाने के लिए सरकार को तत्‍काल कदम उठाने की जरूरत है.

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2021 में एजीआर कैल्कुलेशन में सुधार के लिए वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल की याचिका खारिज कर दी थी. कंपनी के मुताबिक, उस पर 21,500 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया है. इसमें से 7,800 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. वहीं, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस के मुताबिक, कंपनी पर करीब 58,000 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया है.