नगर निगम क्षेत्र के करीब पांच लाख घरों का अक्‍टूबर से सरकारी कागजों में पता बदल जाएगा. नगर निगम क्षेत्र में आने वााले घरों के लिए 17 डिजिट का यूनिक आईडी नंबर जारी किया जाएगा. इस आईडी में राज्‍य से लेकर जिला, मोहल्‍ला, गली और घर का नंबर शामिल होगा. नगर निगम जियोग्राफिक इनफॉरमेशन सिस्‍टम ( GIS) सर्वे करा रहा है. नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार सर्वे का काम सितंबर तक पूरा हो जाएगा, इसके बाद घरों के नंबर जारी कर दिए जाएंगे.

बता दें, नगर निगम की ओर से भवनों का GIS सर्वे कराया जा रहा है. इसके बाद नगर निगम कर्मचारी और सर्वे कर रही कंपनी के कर्मचारी ज्वाइंट सर्वे करेंगे. इसी दौरान भवनों को यूनिक आईडी कोड दिया जाएगा. निगम अधिकारियों का कहना है कि 17 डिजिट के यूनिक आईडी कोड में पहले दो अंक राज्य, तीसरे और चौथे अंक जिले, पांचवें और छठे अंक नगर निगम का होगा. नगर पालिका सातवें और आठवां अंक नगर निगम के जोन का होगा. इसके बाद के अंक वार्ड नंबर, मोहल्ला या कॉलोनी और मकान का होगा.

यूनिक आईडी कोड में व्यावसायिक, रिहाइशी और मिक्स प्रॉपर्टी को प्रदर्शित करने के लिए अलग-अलग कोड होंगे. मिलीजुली प्रॉपर्टी के लिए M, रेजिडेंशियल के लिए R और नॉन रेजिडेंशियल के लिए S कोड होगा. इसके आधार पर अधिकारियों को पता चल जाएगा कि संबंधित भवन की श्रेणी कौन सी है. मौजूदा मैनुअल सिस्टम में सबसे ज्यादा दिक्कत जोन में आने वाले नए प्रभारी, कर अधीक्षक या टैक्स इंस्पेक्टर को होती है. नए अधिकारियों को नहीं पता होता है कि कौन सी प्रॉपर्टी किस स्थान पर है और उस पर टैक्स निर्धारण पूर्व में अधिकारियों ने सही कराया या नहीं. यूनिक आईडी कोड से नए अधिकारी गूगल पर सर्च करेंगे तो पूरी डिटेल के साथ भवन की तस्‍वीर भी दिख जाएगी.

इस संबंध में नगर आयुक्‍त महेंद्र सिंह तंवर बताते हैं कि जीआईएस सर्वे का काम तेजी से कराया जा रहा है. करीब दो माह में सर्वे पूरा हो जाएगा. सर्वे के बाद नगर निगम सीमा क्षेत्र में आने वाले सभी भवनों को यूनिक आईडी कोड दिए दिए जाएंगे.