पत्रकारों की रक्षा करने वाली समिति ने शनिवार को कहा कि अफगान अधिकारियों को रॉयटर्स के फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की हत्या की त्वरित और गहन जांच करनी चाहिए. पुलित्जर पुरस्कार विजेता सिद्दीकी पाकिस्तान की सीमा के पास स्पिन बोल्डक शहर में अफगान सुरक्षा बलों और तालिबान लड़ाकों के बीच हुई झड़प को कवर कर रहे थे.

ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक बयान में रॉयटर्स के अध्यक्ष माइकल फ्रीडेनबर्ग और प्रधान संपादक एलेसेंड्रा गैलोनी ने लिखा कि हम पत्रकार की मौत के दौरान की परिस्थितियों के बारे में अफगान सरकार से जानकारी मांग रहे हैं. वहीं, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में वर्ष 2018 से 2021 के दौरान 33 पत्रकारों की जान गई. इनमें से 10 पत्रकारों की मौत 30 अप्रैल, 2018 को काबुल में एक आत्मघाती हमले में हुई थी.

वाशिंगटन डीसी में सीपीजे के एशिया कार्यक्रम समन्वयक स्टीवन बटलर ने कहा कि रॉयटर्स के फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत एक दुखद सूचना है. भले ही अमेरिका और उसके साथी सेनाएं अफगानिस्तान से वापस आ गई हों, लेकिन पत्रकार अभी भी अफगानिस्तान में काम कर रहे हैं, जो उनके जीवन के लिए बहुत बड़ा जोखिम है.

सीपीजे के अनुसार, सिद्दीकी अपनी मृत्यु के समय अफगान विशेष बलों के साथ जुड़े हुए थे और अफगान बलों और तालिबान लड़ाकों के बीच जारी लड़ाई को कवर कर रहे थे. इससे पहले रिपोर्टिंग के दौरान छर्रे से उसके हाथ में चोट लग गई थी, चिकित्सा उपचार प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपना काम फिर से शुरू कर दिया था.

एक अफगान कमांडर ने रॉयटर्स को बताया कि सिद्दीकी दुकानदारों से बात कर रहे थे जब तालिबान ने हमला किया और बाद में हुई गोलीबारी में उनकी मौत हो गई. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने रॉयटर्स को बताया कि समूह को इस बात की जानकारी नहीं थी कि घटनास्थल पर एक पत्रकार था और कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि सिद्दीकी की हत्या कैसे हुई.