किसान आंदोलन क्यों कर रहे हैं / क्या है किसानों की मांगे
आंदोलनकारी किसान संगठन केंद्र सरकार से तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और इनकी जगह किसानों के साथ बातचीत कर नए कानून लाने को कह रहे हैं. किसानों की मांगें इस तरह हैं… – तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए क्योंकि ये किसानों के हित में नहीं है और कृषि के निजीकरण को प्रोत्साहन देने वाले हैं.
नए कृषि कानूनों को वापस लेने और फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि (एमएसपी) की गारंटी की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं, उनका कहना है कि हम पीछे हटने के लिए नहीं आए हैं.
बता दें, किसान अपनी मांगों को लेकर 32 साल पहले की तरह एक बार फिर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन सरकार ने उन्हें बाहरी दिल्ली के बुराड़ी मैदान में रैली करने की अनुमित दी है. इसके लिए वे पूरी तैयारी के साथ आए हैं. उनका कहना है कि हमारे पास पर्याप्‍त राशन है और हम 4 माह तक रोड पर बैठ सकते हैं. किसानों का कहना है कि हम दिल्‍ली के 5 मेन इंट्री प्‍वाइंट को अवरुद्ध करके दिल्ली का घेराव करेंगे.
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार सितंबर महीने में 3 नए कृषि विधेयक लाई थी, जिन पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद वे अब कानून बन चुके हैं. लेकिन किसानों को ये कानून पसंद नहीं आ रहे हैं. किसानों का कहना है कि इन कानूनों से किसानों को नुकसान और निजी खरीदारों व बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा होगा. इसके साथ किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म हो जाने का भी डर सता रहा है.
बता दें, इसी विरोध प्रदर्शन के हिस्से के तौर पर पंजाब और हरियाणा के किसान 26 और 27 नवंबर को दिल्ली कूच के लिए निकले थे. लेकिन हरियाणा सरकार द्वारा पंजाब से लगे सभी बॉर्डर सील किए जाने के चलते किसान अंबाला और करनाल बॉर्डर पर जमा हैं और लगातार आंदोलन कर रहे हैं. देश के करीब 500 अलग-अलग संगठनों ने मिलकर संयुक्त किसान मोर्चे का गठन किया है,
वहीं, किसानों का आंदोलन जारी है और अब किसान संगठनों ने दो टूक कह दिया कि सरकार को ये कानून वापस लेने ही होंगे. दूसरी ओर सरकार भी किसानों की शिकायतें दूर करने के लिए तैयार है, लेकिन कानून पर टस से मस नहीं होना चाहती है. ऐसे में स्थिति गंभीर होती जा रही है, क्योंकि किसानों का कहना है कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो फिर आंदोलन आक्रामक हो जाएगा.
किसानों ने सरकार को गिनाई आपत्तियां
किसानों ने सरकार के सामने जो ड्राफ्ट भेजा है, उसमें इन मुद्दों को उठाया है.
तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएं.
वायु प्रदूषण के कानून में बदलाव वापस हो.
बिजली बिल के कानून में बदलाव है, वो गलत है.
MSP पर लिखित में भरोसा दे.
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर किसानों को ऐतराज.
किसानों ने कभी ऐसे बिल की मांग की ही नहीं, तो फिर क्यों लाए गए. ये सिर्फ कारोबारियों का फायदा है.
डीजल की कीमत को आधा किया जाए.
किसानों के लिए आज का दिन अहम
आपको बता दें, कि किसान आंदोलन के लिए आज का दिन बड़ा होने वाला है, जिनपर हर किसी की नज़र है. आज अमित शाह और कैप्टन अमरिंदर की मुलाकात होगी. वहीं भीम आर्मी के चंद्रशेखर सिंधु बॉर्डर पर पहुंचेंगे और किसानों और सरकार के बीच होगी एक और बातचीत
कृषि कानून वापस लेने की मांग पर अड़े किसानों से आज दोपहर 12 बजे सरकार फिर बात करेगी. किसानों की मांग है कि MSP को पक्का किया जाए, मंडी सिस्टम पर धूल के बादल हटाए जाएं वरना संसद का सत्र बुलाकर कानून ही वापस ले लिया जाए. लेकिन सरकार का कहना है कि जल्द ही वो किसानों के साथ समाधान निकाल लेंगे. सरकार कृषि कानून के मसले पर पीछे हटती नहीं दिख रही है.
दिल्ली के कौन से एंट्री प्वाइंट बंद हैं, कहां से लोग कर सकते हैं यात्रा
किसानों के प्रदर्शन के कारण सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, चिल्ला बॉर्डर समेत कई बॉर्डर को बंद कर दिया गया है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है. इसके मुताबिक, गुरुवार को भी नोएडा लिंक रोड पर स्थित चिल्ला बॉर्डर को बंद रखा गया है. यहां पर गौतम बुद्ध द्वार पर सैकड़ों किसान सड़क जाम करके बैठे हैं.